मकर संक्रांति ओडिशा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है जो प्रतिवर्ष पौष माह में (14-15 जनवरी) मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को दर्शाता है और परंपरागत रूप से इसे उत्तरायण (सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा) का आरंभ माना जाता है।

मकर संक्रांति कब मनाई जाती है?
मकर संक्रांति एक सौर पर्व है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष 14 या 15 जनवरी को पड़ती है। चंद्र कैलेंडर पर आधारित अधिकांश अन्य हिंदू त्योहारों के विपरीत यह सौर पर्व है, इसलिए इसकी तारीख लगभग स्थिर रहती है।
| वर्ष | मकर संक्रांति तिथि |
|---|---|
| 2026 | 14 जनवरी |
| 2027 | 14 या 15 जनवरी (ओडिया पंजिका देखें) |
| 2028 | 15 जनवरी (ओडिया पंजिका देखें) |
सूर्य के राशि परिवर्तन के सटीक समय के अनुसार विभिन्न पंचांगों में तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इस पर्व का महत्व
मकर संक्रांति विभिन्न कारणों से महत्वपूर्ण है:
खगोलीय महत्व
- उत्तरायण का आरंभ — परंपरागत रूप से सूर्य की उत्तरमुखी यात्रा का आरंभ माना जाता है
- दिन की वृद्धि — दिन बड़े हो रहे होते हैं; खगोलीय रूप से यह लगभग 21 दिसंबर के शीत अयनांत (विंटर सॉल्स्टिस) से ही शुरू हो जाता है। अयन-चलन (प्रिसेशन) के कारण सदियों में इन दोनों तिथियों के बीच का अंतर बढ़ गया है
- शीत का अंत — कड़ाके की सर्दी समाप्त होती है
धार्मिक महत्व
- पुण्य काल — दान, स्नान और पूजा का शुभ समय
- भीष्म का देहत्याग — महाभारत में भीष्म ने इसी दिन देह त्याग किया
- देवताओं का दिवस — उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है
कृषि महत्व
- फसल कटाई — नई धान की कटाई हो जाती है
- नया चावल — नवान्न उत्सव के रूप में मनाया जाता है
- किसानों के लिए आशीर्वाद — अच्छी फसल के लिए प्रार्थना
"मकर संक्रांति नई आशा, नए उद्देश्य और नई शुरुआत का प्रतीक है।"
ओडिशा में मकर संक्रांति का उत्सव
ओडिशा में मकर संक्रांति बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इसे विशेष रूप से "मकर" या "मकर मेला" के नाम से जाना जाता है।
प्रमुख रीति-रिवाज
प्रातःकालीन स्नान
- नदी स्नान — महानदी, ब्राह्मणी और अन्य नदियों में स्नान
- सरोवर स्नान — चिल्का के पवित्र स्थानों पर स्नान
- तिल तेल मालिश — शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान
पूजा और अर्चना
- सूर्य पूजा — सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पण
- गृह पूजा — लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की पूजा
- तुलसी पूजा — तुलसी के पौधे पर दीप जलाना
दान
- तिल दान — तिल से बनी वस्तुओं का दान
- गुड़ दान — मिठाइयों का दान
- वस्त्र दान — नए कपड़ों का दान
- गो दान — गाय का दान (अत्यंत पुण्यदायी)
मकर संक्रांति के पीठा और पकवान
ओडिशा में मकर संक्रांति पीठा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। इस समय घर-घर में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक चावल के केक (पीठा) बनाए जाते हैं।

प्रमुख पीठा
| पीठा का नाम | विवरण | मुख्य सामग्री |
|---|---|---|
| चकुली पीठा | पतला, गोलाकार पीठा | चावल और उड़द दाल का घोल |
| मंडा पीठा | भाप में पकाया गया पीठा | चावल का आटा, नारियल, गुड़ |
| काकरा पीठा | मीठे भरावन वाला तला हुआ पीठा | आटा, नारियल, गुड़ |
| एंदुरी पीठा | हल्दी के पत्ते में भाप से पकाया | चावल, उड़द दाल, नारियल |
| अरिसा पीठा | मीठा, गहरा भूरा रंग | चावल का आटा, गुड़, घी |
| पोड़ पीठा | भुना नारियल भरावन | चावल का आटा, नारियल, गुड़ |
| छितौ पीठा | सफेद, मुलायम पीठा | उबले चावल |
अन्य पकवान
- मकर चौला — नई फसल का कच्चा (बिना पका) चावल, जिसमें केला, नारियल, गुड़, तिल, दूध आदि मिलाए जाते हैं
- तिल लड्डू — तिल और गुड़ की लड्डू
- मूंग लड्डू — मूंग दाल की लड्डू
- खीरी — दूध और चावल की खीर
- छेना झिल्ली — पनीर की मिठाई
ओडिशा के प्रसिद्ध मकर मेले
ओडिशा के विभिन्न स्थानों पर मकर संक्रांति के अवसर पर बड़े-बड़े मेले लगते हैं।
चंद्रभागा मेला, कोणार्क (माघ सप्तमी को)
कोणार्क का सबसे प्रसिद्ध सूर्य पर्व मकर संक्रांति के कुछ सप्ताह बाद माघ सप्तमी (जनवरी–फरवरी) को मनाया जाता है।
- स्थान: चंद्रभागा समुद्र तट, कोणार्क, पुरी जिला
- विशेषता: सूर्योदय के समय पवित्र स्नान, सूर्य मंदिर दर्शन
- किंवदंती: परंपरा के अनुसार, श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब यहाँ सूर्य की उपासना करके कुष्ठ रोग से मुक्त हुए थे
- श्रद्धालुओं की संख्या: हज़ारों
भक्तगण सूर्योदय के समय पवित्र स्नान करके सूर्य मंदिर का दर्शन करते हैं।
जगन्नाथ मंदिर, पुरी
- विशेष पूजा — विशेष अनुष्ठान, और भगवान जगन्नाथ को मकर चौला का भोग अर्पित
अन्य प्रसिद्ध मेले
- मकर मेला — धवलेश्वर, कटक
- मकर मेला — हाटकेश्वर मंदिर, अत्री, खोर्धा
- मकर मेला — मकरमुनि मंदिर, बालेश्वर
पतंग उड़ाने की परंपरा

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाना एक लोकप्रिय परंपरा है। ओडिशा के कई स्थानों पर पतंग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं।
पतंग उड़ाने का महत्व
- आनंद और उत्साह — परिवार एक साथ मिलकर पतंग उड़ाते हैं
- सूर्य किरण ग्रहण — सुबह की धूप शरीर के लिए लाभदायक
- सामाजिक मिलन — पड़ोसियों और मित्रों से मिलना
सांस्कृतिक महत्व
मकर संक्रांति ओडिशा की संस्कृति से गहराई से जुड़ी है:
पारिवारिक मिलन
- विवाहित महिलाओं का आगमन — पितृ गृह आती हैं
- पीठा वितरण — संबंधियों को पीठा दिया जाता है
- आशीर्वाद — बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है
लोक गीत और नृत्य
मकर संक्रांति के अवसर पर विभिन्न लोक गीत गाए जाते हैं, और ये गीत क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होते हैं।
नवान्न पालन
किसान परिवार नई फसल के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
मकर संक्रांति दिवस की कार्यसूची
परिवारों में अंतर होता है, पर आम तौर पर दिन तिल तेल मालिश और भोर के स्नान से शुरू होता है; फिर उगते सूर्य को अर्घ्य, पूजा और दान, मकर चौला, पीठा और विशेष भोजन, और बाद में पतंगबाज़ी व सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
आधुनिक उत्सव
आजकल मकर संक्रांति:
- सोशल मीडिया — #मकरसंक्रांति ट्रेंडिंग
- ऑनलाइन शुभकामनाएं — डिजिटल कार्ड भेजना
- प्रवासी ओडिया — विश्व के विभिन्न स्थानों पर मनाना
- पीठा मेला — शहरों में पीठा प्रदर्शनी
शुभकामना संदेश
मकर संक्रांति के अवसर पर ये शुभकामना संदेश प्रयोग किए जाते हैं:
- "मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!"
- "मकर मेले की शुभकामनाएं!"
ओडिया में शुभकामनाएं
- "ମକର ସଂକ୍ରାନ୍ତି ଶୁଭେଚ୍ଛା!" (मकर संक्रांति शुभेच्छा!)
- "ମକର ମେଳାର ଶୁଭକାମନା!" (मकर मेलार शुभकामना!)
सारांश
मकर संक्रांति ओडिशा का एक समृद्ध सांस्कृतिक पर्व है जो:
- सूर्य देवता को समर्पित है
- नई फसल का उत्सव है
- पीठा और मिठाई पाक-प्रणाली की प्रदर्शनी है
- परिवार और समाज के मिलन का अवसर है
यह पर्व ओडिशा की परंपरा, धर्म और संस्कृति का सुंदर समन्वय है।
संबंधित: नुआखाई • राजा पर्व • ओडिया संस्कृति

